फेसबुक का नाम हुआ ‘मेटा’, जाने क्या होता है मेटा और कैसे प्रभावित होंगे आप

सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी फेसबुक ने अपना नाम बदलने का फैलसा किया है. फेसबुक ऐसा नाम है जिसे बच्चा-बच्चा जानता और इस्तेमाल करता है.

पढ़ते है और समझने कि कोशिश करते है पूरी जानकारी। फेसबुक अब ‘मेटा’ के नाम से जाना जाएगा. फेसबुक अपनी रिब्रन्डिंग और “मेटावर्स” को विकसित करने के रूप में अपना नाम बदलकर “मेटा” कर रही है. सीईओ मार्क जुकरबर्ग ( Mark Zuckerberg ) ने गुरुवार को कहा, ‘”अब से, हम पहले मेटावर्स होने जा रहे हैं, ना की फेसबुक,”. हालाँकि, अभी फ़िलहाल किसी सॉफ्टवेर के नाम में कोई तबदीली नही आएगी.

मार्क जुकरबर्ग ने कंपनी के वार्षिक इन-हाउस वर्चुअल रियलिटी सम्मेलन ‘फेसबुक कनेक्ट’ में यह घोषणा की. “फेसबुक और उनकी पूरी टीम एक साल से ज्यादा समय से काम कर रही थी उन्होंने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि लोग एक दिन फेसबुक को सोशल नेटवर्क से ज्यादा “मेटावर्स कंपनी” के रूप में जानेंगे.”

मार्क जुकरबर्ग का मानना है कि मेटावर्स इंटरनेट से भी आधुनिक दुनिया है. इन्टरनेट की अगली पीढ़ी के रूप में देख सकते हैं जो लोगों को डिजिटल स्पेस में एक-दूसरे के साथ उपस्थित होने की अनुभव देगा. “मेटावर्स के भीतर, आप बाहर घूमने, दोस्तों के साथ गेम खेलने, काम करने, बनाने और बहुत कुछ करने में सक्षम होंगे.” “आप मूल रूप से वह सब कुछ करने में सक्षम होंगे जो आप आज इंटरनेट पर कर सकते हैं और साथ ही कुछ चीजें जो आज इंटरनेट पर समझ में नहीं आती हैं, जैसे नृत्य.” सोशल मीडिया की दिग्गज कंपनी अपनी अपारदर्शी नीतियों के लिए सालों से चपेट में आ रही हैं.

चाहे वह गलत सूचनाओं के प्रचार और प्रसार या उपयोगकर्ता कि डेटा कीसमस्या. हाल के महीनों में मामले और भी बदतर हो गए हैं जब एक व्हिसलब्लोअर ने कंपनी के कई रहस्यों को उजागर किया. वहीं, सोशल प्लेटफॉर्म का क्रेज युवा यूजर्स में कम होता जा रहा है. कई लोग इसके बजाय चीनी ऐप टिकटॉक का इस्तेमाल कर रहे हैं. फेसबुक विज्ञापन बेचकर पैसा कमाता है. अगर उपयोगकर्ता संख्या घटती है, तो विज्ञापन में कमी भी आएगी.

खुद को एक नई, भविष्यवादी कंपनी के रूप में स्थापित करके, फेसबुक सोशल मीडिया कंपनियों की रेस में – और अपनी खराब प्रतिष्ठा से आगे निकलने की उम्मीद कर रहा है. फेसबुक सहित मेटावर्स के अधिवक्ताओं ने जोर देकर कहा है कि कोई एक ही कंपनी मेटावर्स को नहीं चलाएगी. अथवा बहुत सारे कंपनी इसमें भाग ले सकते है. लेकिन इस मॉडल को सामने लाते हुए, फेसबुक अपने आप को सबसे आगे रखना कहेगा. वास्तव में, इंटरैक्टिव ऑनलाइन गेम जैसे रोबॉक्स और माइनक्राफ्ट के साथ-साथ सॉफ्टवेयर डेवलपर एपिक गेम्स पहले से ही मौजूद हैं.

फेसबुक ने 2014 में वर्चुअल रियलिटी डिवाइस निर्माता ‘ओकुलस’ का अधिग्रहण कर लिया था. हाल ही में कहा था कि वह अपनी मेटावर्स पहल में प्रति कई अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बना रहा है. फेसबुक ने नाम तो बदल दिए पर इनके पैसे कमाने का जरिया क्या होगा? जुकरबर्ग ने इसका जवाब देते हुए यह कहा है किउनकी कंपनी अभी कमाई करने के तरीके के बारे में नही सोच रही है.

बल्कि, “एक बहुत बड़ी डिजिटल अर्थव्यवस्था” मेटावर्स के भीतर ही खोलने कि तयारी में है.. उन्होंने आगे कहा, “मुझे लगता है कि डिजिटल सामान और निर्माता बहुत बड़े होने जा रहे हैं”. फेसबुक के मेटावर्स प्रोडक्ट्स के प्रमुख विशाल शाह ने मुख्य वक्ता के रूप में कहा, “वाणिज्य मेटावर्स का एक बड़ा हिस्सा बनने जा रहा है.” “हम भौतिक और डिजिटल दोनों उत्पादों को बेचने में सक्षम होने जा रहे हैं.” फेसबुक को दूसरी कंपनी से काफी चुनोती मिल रही है जैसे Tiktok.

अगर फेसबुक खेल में बने रहना चाहता है, तो लक्षित विज्ञापन पर निर्भरता से दूर जाने का यह सही समय हो सकता है. टेक दिग्गज कंपनी को अपने उपयोगकर्ता कि डेटा गोपनीयता एक कठिन चुनोती दे रहा है. हालाँकि पिछले 18 महीनों में डेटागोपनीयता में बेशक सुधार हुआ है.

मेटावर्स के अज्ञात दुनिया में ना सिर्फ जाने का प्रयास है बल्कि पूरी दूसरी दुनिया बनाने का भी है. बेशक ही इसमें ढेरों कठिनाइयाँ आएगी. नेकिल फेसबुक जैसी बेहतरीन कंपनी से सफल होने कीउम्मीद ज्यादा है. फेसबुक भी इस बात को जानता-समझता है, तभी हर खदम समझदारी से ले रहा।

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