क्लास 2 में ही खो दी थी आँखों की रौशनी, परिवार पर नहीं बनना चाहती थी बोझ, चुनैतियों से लड़कर ऐसे बनी PCS अफसर

बहुत बड़ी सफलता पाने के लिए जीवन में एक लक्ष्य और कड़ी मेहनत का होना जरुरी है, ऐसा बहुत से लोग मानते हैं। पर क्या आपने कभी ऐसा सोचा है, की कोई ऐसा व्यक्ति हो, जो कठिन से भी कठिन प्रयास करना चाहता हो। पर किन्हीं कारण वश, वो उसे नहीं कर पा रहा हो या उसे उस काम को करने के लिए बहुत सी मुसीबतों से होकर गुजरना पर रहा हो। सुनने में ये सब बड़ा अजीब सा लगता है, की ऐसा कौन होगा जो कोई काम करना चाहे, पर नहीं कर पाए। पर ये बात कभी कभी सच भी हो जाती है।

आज कहानी में हम आपको एक ऐसी ही शख्स बारे में बताने जा रहें हैं, जो कठिन से कठिन परिश्रम से भी नहीं डरती, पर दृष्टिहीन होने के वजह से उन्हें काफी मुश्किलों से होकर गुजरना पड़ा।

ओडिशा की रहने वाली तपस्विनी दास (Tapaswini Das) का झुकाव बचपन से ही पढाई की तरफ था। हमेशा ही उनका ध्यान पढाई पर केंद्रित होता था, पर जब वो क्लास 2 में थी, तब उनके साथ एक बेहद ही भयावह घटना घटी, डॉक्टरों की लापरवाही के कारण तपस्विनी को बचपन में ही अपने दोनों आँख गवाने पड़े और उनकी आँखों की रौशनी चली गयी।

तपस्विनी कहती हैं की, जब उनकी माँ को इस बात का पता चला था, तब वो चीख पड़ी थी, उनके मुँह से यही निकला था की – हे भगवान मेरी बच्ची को क्या हो गया, अब इसकी शादी कैसे होगी। जब ऐसे हालात हों तो माँ बाप पर क्या बीतती है, इस बात का अंदाजा कोई नहीं लगा सकता है। तपस्विनी की माँ भी अपनी बेटी के लिए काफी चिंतित थी।

तपस्विनी दास ने आँखों की रौशनी चले जाने के बाद भी हार नहीं मानी और उन्होंने अपनी पढाई को जारी रखा। आपको बता दें की तपस्विनी ब्रेल लिपि के सहारे पढाई किया करती थी, इसके साथ ही ऑडियो रिकॉर्डिंग को भी उन्होंने अपने पढाई का जरिया बना लिया, वो नए-नए तरकीब से पढाई कर रही थी, पर उन्हें रुकना नहीं था।

तपस्विनी कहती हैं की जब वो नवीं कक्षा में थी, तब से ही उन्हें सिविल सर्विसेज के प्रति झुकाव होने लगा था। तपस्विनी के पिता अरुण कुमार कहते हैं की, तपस्विनी हमेशा से ही पढ़ने में काफी मेधावी छात्र थी और क्लास 10 और 12 में उसने काफी अच्छे अंकों से परीक्षा पास की, इसके साथ ही स्नातक की पढाई में भी वो बेहतरीन अंकों से उत्तीर्ण हुई।

बता दें की तपस्विनी दास ने भुवनेश्वर के उत्कल यूनिवर्सिटी से अपनी पोस्ट ग्रैजुएशन की पढाई पूरी की है। तपस्विनी को हमेशा से ही जीवन में कुछ बड़ा करना था ताकि उनके माँ बाप को उनके लिए ज्यादा सोचना ना पड़े। सिविल सर्विसेज के प्रति उनका झुकाव तो पहले से था ही, इसलिए उन्होंने ओडिशा सिविल सर्विसेज की परीक्षा देने का मन बना लिया पर इसकी राह इतनी आसान नहीं थी।

तपस्विनी कहती हैं की, उन्हें तैयारी करने के लिए काफी सारे बुक्स और नोट्स का सहारा लेना होता था, ऐसे में दृष्टिहीनता उनके रास्ते की सबसे बड़ी रोड़ा थी, पर उन्होंने हार नहीं मानी और ऑडियो रिकॉर्डिंग से अपनी पढाई को जारी रखा, वो कहती हैं की उन्होंने अपने लैपटॉप में ही काफी सारे स्टडी मेटेरियल्स के ऑडियो रख लिए थे, जिसकी वजह से वो, उन्हें कहीं भी बैठ कर सुन सकती थी और ऐसे उनको तैयारी में काफी मदद मिली।

तपस्विनी की कठिन लगन और परिश्रम आखिरकार साल 2018 में सार्थक हुई, जब उन्हें ओडिशा सिविल सर्वसिज की परीक्षा में शानदार सफलता मिली और पुरे राजय में उन्हें 161 वां रैंक हासिल हुआ। आपको बता दें की ओडिशा सिविल सर्विसेज में दृष्टिहीन उम्मीदवारों के लिए आरक्षण है।

फिर भी तपस्विनी दास ने सामान्य केटेगरी से अपनी परीक्षा देने का फैसला किया था। 23 साल की उम्र में ही तपस्विनी दास के दृढ निश्चय ने उनको ऐसे मकाम पर पंहुचा दिया, जो बहुत से लोगों के लिए सिर्फ सपना है। तपस्विनी की कहानी से हमें ये सीख मिलती है की कठिन रास्तों को भी मजबूत इरादों से पार किया जा सकता है।

The Live Post तपस्विनी को उनकी सफलता के लिए बधाई देता है और उनके उज्वल भविष्य की कामना करता है।

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