आखिर ऐसी कौन सी घटना हुई? जिसने एक बस कंडक्टर की बेटी को बना दिया IPS

जब भी कोई आम इंसान किसी बड़े लक्ष्य को प्राप्त करता है, तो उसके पीछे कोई न कोई कहानी या घटना जरूर होती है। कभी-कभी ऐसी घटनाएं ही जीवन में किसी शख्स को आगे पढ़ने की लिए प्रेरित करती हैं। आज अंतराष्ट्रीय महिला दिवस पर हम आपको एक ऐसी ही लड़की की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसके जीवन में एक घटना के बाद से बहुत बड़ा बदलाव आया।

इसके साथ ही उसने एक ऐसा लक्ष्य चुना जो काफी मुश्किल था। पर अपनी कड़ी लगन और मेहनत से उसने उस लक्ष्य को न ही सिर्फ हासिल किया बल्कि उसने अपना और अपने परिवार का नाम भी रौशन किया। आज (UPSC Success Stories) में हम आपको IPS शालिनी अग्निहोत्री (Shalini Agnihotri) की कहानी बता रहे हैं।

शालिनी हिमाचल के ऊना के दूररदराज आने वाले गांव ठठल से आती हैं, उनका जन्म 14 जनवरी 1984 को हुआ था। शालिनी एक बेहद ही साधारण परिवार से हैं। आपको ये जानकार ताजुब होगा की शालिनी के पिता रमेश, हरियाणा रोड ट्रांसपोर्टेशन कंपनी (HRTC) में बस कंडक्टर का काम करते है।

बहुत से लोग ये हमेशा सोचते हैं की अगर आप किसी छोटे बैकग्राउंड से आते हैं, तो उनके लिए IAS या IPS बनना बस एक सपना जैसा ही है। पर शालिनी अग्निहोत्री ने इस सपने जैसे लगने वाले टारगेट को अपनी दृढ़ इक्षाशक्ति और मेहनत से प्राप्त किया है। शालिनी की शुरुवाती पढाई धर्मशाला के DAV स्कूल से हुई है, बता दें की शालिनी बचपन से ही होनहार छात्र थी।

जिसका गवाही उनके मार्क्स भी देते हैं, शालिनी अग्निहोत्री को 10 वीं में 92.2% मार्क्स हासिल हुए थे, वहीं 12 में उन्हें 77% नंबर मिले। 12 वीं तक की पढाई करने के बाद शालिनी अग्निहोत्री (Shalini Agnihotri) ने हिमाचल प्रदेश एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। यहाँ तक शालिनी की कहानी तो किसी आम लड़की की तरह ही लगती है।

पर इसके आगे जो होने वाला था वो बहुत खास था। शालिनी बचपन से ही UPSC की तैयारी कर IPS बनना चाहती थी। वो आईपीएस क्यों बनना चाहती थी, इसके पीछे भी एक दिलचस्प कहानी है और इसी कहानी के बारे में हम आपको इस लेख के शरुआत में बताना चाह रहे थे।

दरसल शालिनी जब एक बार अपनी माँ के साथ बस में सफर कर थी तब उनके साथ एक घटना घटी, हुआ ये की उनकी माँ की सीट के पीछे एक व्यक्ति सहारा लेने के लिए बार-बार हाथ रख रहा था, जिससे शालिनी की माँ को काफी तकलीफ हो रही थी। ये देख कर शालिनी ने उस व्यक्ति को आग्रह किया की आप कृपया अपना हाथ हटा लें, पर वो व्यक्ति नहीं माना।

इसके बाद शालिनी ने उस व्यक्ति को दुबरा हाथ हटाने को कहा इस पर वो व्यक्ति झल्ला गया और उसने कहा की तुम कही की डीसी हो जो तुम्हारी बात मान लूँ। ये बात सुनकर शालिनी काफी सोच में पड़ गयी आखिर ये डीसी कौन होता है, जिसकी बात सभी मान लेते हैं।

शालिनी अब इस बात के पीछे की वजह जानने के लिए काफी जिज्ञासु थी, वो कहती हैं की जब वो 10th क्लास में थी तब जाकर उन्हें धीरे धीरे ये पता चला की डीसी और एसपी कौन होते हैं तथा उनके पावर्स क्या क्या होते हैं। शालिनी जब कॉलेज पहुंची तभी से उन्होंने यूपीएससी की परीक्षा की तयारी करनी शुरू कर दी थी।

शालिनी कहती हैं की कॉलेज के खत्म होने के बाद वो यूपीएससी की तैयारी करती थी, वो देश के सबसे बड़े परीक्षा UPSC की तयारी कर रही हैं, इस बात को उन्होंने अपने घरवालों तक नहीं बताया था। यूपीएससी की परीक्षा अपने आप में एक बहुत ही बड़ी परीक्षा है और ऐसे एग्जाम में पास होने के लिए घरवालों का सपोर्ट होना बहुत जरुरी होता है।

इसका सबसे बड़ा कारण इस परीक्षा की तयारी से लेकर रिजल्ट आने में लगने वाला समय भी है। कई बार अभ्यार्थी तयारी करते हुए निराश भी हो जाते हैं, ऐसे में परिवार की भूमिका काफी अहम हो जाती है।

पर शालिनी अग्निहोत्री (Shalini Agnihotri) बिलकुल अलग है, उन्होंने किसी को बिन बताये ही तयारी शुरू कर दी थी, उनका मानना था की ये बहुत ही बड़ी परीक्षा है और अगर वो किसी कारण वश इसमें सफल नहीं होती है, तो उनके घरवाले इस से काफी दुखी और निराश होंगे।

शालिनी कहती हैं की उनको अपने हॉस्टल में पढाई करना काफी अच्छा लगता था, वहां काफी शांति और सुकून थी जिसके कारण वहां का माहौल पढाई के लिए सबसे उपयुक्त था। उन्होंने परीक्षा की तयारी काफी जोर शोर से शुरू कर दी थी। शालिनी ने इतने बड़े परीक्षा की तयारी खुद से ही की, इसके लिए वो न किसी बड़े शहर में गयी।

ना हीं उन्होंने किसी भी कोचिंग का सहारा लिया। शालिनी कहती हैं की उन्होंने इंटरनेट से ही इस एग्जाम की तयारी शुरू कर दी थी, इसके साथ-साथ वो न्यूजपेपर्स और मैगजीन्स भी पढ़ा करती थी। शालिनी इन्हीं माध्यमों से इस महत्वपूर्ण एग्जाम की तयारी कर रही थी।

आखिरकार साल 2011 में वो समय आया जब शालिनी (Shalini Agnihotri) को यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा प्रीलिम्स देनी थी। शालिनी इस परीक्षा में बेहद अच्छे मार्क्स के साथ सफल हुई। उसी साल उन्होंने यूपीएससी की लिखित परीक्षा को पास कर लिया और इंटरव्यू के पास पहुंच गयी। इस परीक्षा में इंटरव्यू सबसे निर्णायक होता है।

इसी के बाद ये तय होता है की कौन से अभ्यार्थी सेलेक्ट हुए है और किसका सपना टूट गया। इंटरव्यू देने के बाद शालिनी को थोड़ा इंतजार करना पड़ा, पर उनका ये इंतजार उनके लिए बहुत बड़ी खुशखबरी लेकर आने वाला था।

साल 2012 में UPSC द्वारा घोषित किये गए परीक्षा पारिणामों में शालिनी सफल हुई और उन्हें पुरे देश में 285 वां रैंक हासिल हुआ। शालिनी के लिए ये उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और सुखद पल था। उनका बचपन से ही पुलिस में जाने का सपना अब पूरा होने वाला था।

रिजल्ट आने के बाद शालिनी ने आईपीएस चुना, आपको बता दें की शालिनी 65 वें आईपीएस बैच की बेस्ट ट्रेनी रही और उन्हें इसके लिए सम्मानित भी किया गया। उन्हें राष्ट्रपति के द्वारा भी पुरष्कार मिल चूका है। ट्रेनिंग कम्पलीट हो जाने के बाद शालिनी की पहली पोस्टिंग उनके गृह राज्य हिमाचल में ही हुई।

गौरतलब है की कुल्लू में पोस्टिंग होने के बाद से शालिनी अग्निहोत्री ने नशे के कारोबारियों के खिलाफ एक अभियान छेड़ रखा था और नशे का व्यापर करने वालों पर उन्होंने काफी शख्त कदम उठाये। शालिनी की छवि एक ईमानदार पुलिस अफसर की है, बता दें की शालिनी की 1 बहन और 1 भाई है, बहन डॉक्टर है वहीं भाई इस समय आर्मी में है। शालिनी की शादी एसपी संकल्प शर्मा से हुई है।

शालिनी (Shalini Agnihotri) कहती हैं सपने हकीकत में भी सच होते हैं और इसके लिए बैकग्राउंड बिलकुल भी मायने नहीं रखता, बस ये मायने रखता है की आप उस सपने को लेकर कितने गंभीर हैं। अगर आप पूरी तरह से अपने सपने के प्रति समर्पित हो जाते हैं, तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।

आज शालिनी अग्निहोत्री देश की टॉप महिला आईपीएस में से एक हैं, The Live Post उन्हें उनके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनायें देता है तथा हमारे देश की बेटियां ऐसे ही आगे बढे ऐसी कामना करता है।

ये भी पढ़ें – माँ बेचती थी देशी शराब, कभी नहीं देख पाए पिता की शक्ल, झोपड़ी में रहने वाला ये लड़का ऐसे बना IAS