14 साल की उम्र में बेचा दूध और पेपर, 18 की उम्र में काटें लोगों के बाल, आज अरबों की संपत्ति का मालिक है ये नाइ!

जब हम कभी भी किसी बड़े बिजनसमैन के बारे या उसकी सफलता के बारे में सुनते हैं, तो एक पल के लिए हमारे मन को ऐसा लगता है की वाह कितनी अच्छी है इनकी लाइफ! हमें बस उस समय उस व्यक्ति की सिर्फ सफलता दिखाई दे रही होती है। हम उस सफल व्यक्ति के किये गए प्रयासों के बारे में नहीं जानते या उनसे अनजान होते हैं।

जीवन में सफल होना हर कोई चाहता है, पर सफलता इतनी आसानी से नहीं मिलती है, इसके लिए बेहद कठिन परिश्रम और त्याग की जरुरत होती है। आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स के बारे में बताने जा रहें हैं जिन्होंने बचपन से ही जी जान से मेहनत की और इसका नतीजा यह है की वो आज अरबों की संपत्ति के मालिक हैं।

कर्नाटक के बेंगलुरु से तालुख रखने वाले रमेश बाबू का जीवन काफी संघर्षों से भरा रहा है। 14 साल की उम्र में जब आम बच्चे अपनी पढाई और खेल कूद में व्यस्त रहते हैं, उस उम्र से ही रमेश काम कर रहें हैं। रमेश बाबू ने 14 साल की उम्र ही काम करना शुरू कर दिया था और तब वे लोगों के घरों में दूध और पेपर दिया करते थे।

इस से उनको 100 रूपए महीने की कमाई हो जाती थी, पर घर की हालात अच्छे नहीं होने के कारण रमेश की माँ को दूसरों की घरों काम करना पड़ता था, जिस से घर का खर्च चलाया जा सके। रमेश के पिता का सलून का बिजनेस था पर जब रमेश कम उम्र के ही थे, तब ही उनके पिता गुजर गए थे जिसके बाद से उनके चाचा इस बिजनेस को सँभालते थे।

रमेश जब 18 साल के हुए तो उन्होंने सलून में लोगों के बाल काटने शुरू कर दिए और इस कारोबार को अपने कंधों पर ले लिया। रमेश कहते हैं की उनका सलून का बिजनेस काफी अच्छा चलने लगा था, कभी कभी तो उन्हें 15 से 18 घंटे तक काम करना पड़ता था, इतनी अधिक भीड़ उनके सलून में होती थी। पर रमेश को कुछ और बड़ा करना था, वो थोड़े से में खुश होने वालों में से नहीं थे।

साल 1993 में रमेश में ने खुद उपयोग करने के लिए लोन पर मारुती ओमनी गाड़ी खरीदी था, पर शुरुवाती महीनों में वो लोन की ईएमआई तक भरने में नाकाम रहे। रमेश कहते हैं की उनकी माँ एक नंदनी नाम की औरत के यहाँ काम करती थी, उन्होंने रमेश को कहा की तुम्हारी कार ऐसे ही पड़ी है, तो उसे किराये पर क्यों नहीं देते।

यहीं से रमेश बाबू की ज़िंदगी पूरी तरह से बदल गयी और उनका कार किराये पर देने का आईडिया चल निकला। शुरुवाती दिनों में रमेश खुद ही कार चलाया करते थे पर धीरे-धीरे वो अपने व्यापार को काफी आगे ले गए। रमेश के जीवन में बड़ा ट्विस्ट तब आया जब उन्होंने 2011 में 3.5 करोड़ की रोल्स रॉयस लक्जरी कर खरीदी। इस महंगे कर वो 50 हजार प्रति दिन के हिसाब से किराये पर देते थे।

इसके बाद से रमेश ने कई लक्जरी कारें खरीदी और उन्हें भी किराये पर देने लगे। रमेश बाबू के पास आज 378 कारें जिसमे 120 लक्जरी कारें भी शामिल है। इन सब के बावजूद रमेश आज भी लोगों की हेयर कटिंग किया करते हैं, उनका मानना है की यही उनका मुख्य पेशा था जिस से वो आज इतने सफल बन पाए हैं।