कभी जुत्तों की दुकान पर बैठने वाला ये लड़का कैसे बना IAS? जानिए संघर्ष भरी कहानी

[Shubham Gupta IAS Success Story] भारत की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाने वाली  यूपीएससी परीक्षा में प्रत्येक वर्ष लाखों की संख्या में प्रतियोगी सम्मिलित होते हैं जिसमें  लाखों में से कुछ हजार  ही मेंस की परीक्षा के लिए चुने जाते हैं। जिसमें केवल 0.2% ही आईएएस बन पाते हैं। इस परीक्षा में सफल होने के लिए प्रतियोगियों को परीक्षा के 3 चरणों से गुजरना होता है प्रीलिम्स, मेंस तथा इंटरव्यू। इस प्रतियोगिता में सफल होने के प्रतिशत से ही यह अनुमान लगाया जा सकता है कि इसमें सफल होने के लिए कड़ी  मेहनत, हार न  मानने की इच्छाशक्ति तथा आत्मविश्वास का होना बेहद जरूरी है। 

आज हम आपको बताएंगे वर्ष 2018 के यूपीएससी में  छठी रैंक प्राप्त करने वाले (Shubham Gupta IAS) के बारे में जिन्होंने 3 प्रयासों में असफल होने के बाद भी हार नहीं मानी और अपनी मजबूत इच्छाशक्ति तथा सफलता प्राप्त करने के जज्बे के कारण वर्ष 2018 में उन्होंने 6 वीं रैंक हासिल की।

Shubham Gupta UPSC RANK 6

उनका आईएएस अधिकारी बनने का सफर इतना भी आसान नहीं था अपने पिता के साथ जूतों की दुकान पर बैठने वाले शुभम ने अपने पिता के सपने को सच करने के लिए, अपनी दिन रात की  गई मेहनत के कारण ही सफल हो पाए। 

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जयपुर, राजस्थान के रहने वाले (Shubham Gupta) ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा वहीं से प्राप्त की परंतु घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण उनके पूरे परिवार को महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव दहानू में आना पड़ा जहां उनके पिता जूते का एक छोटा-सा कारोबार करते थे। जिसके बाद उन्होंने 8वीं से 12वीं तक की शिक्षा  गुजरात के वापी के निकट एक विद्यालय में पूरी की जो इनके घर से लगभग  80 किमी दूर था। स्कूल दूर होने के कारण उन्हें और उनकी बहन को रोज सुबह ट्रेन से जाना पड़ता था और आने में उन्हें शाम हो जाती थी।

Shubham-Gupta-IAS

तीन भाई बहनों में छोटे (Shubham Gupta) के बड़े भाई आईआईटी की तैयारी के लिए दूसरे शहर में रहते थे। इसीलिए पिता की सहायता करने के लिए शुभम स्कूल से आने के  बाद उनके साथ दुकान पर बैठा करते थे। पढ़ाई तथा पिता के  छोटे- से दुकान  में हाथ बटाने के बावजूद जब शुभम ने 10 वीं कक्षा में अच्छे अंक लाए तो लोगों ने उन्हें 12 वीं में विज्ञान लेने की सलाह दी लेकिन शुभम को कॉमर्स पसंद था जिसके कारण उन्होंने 12 वीं में कॉमर्स लिया।

Shubham Gupta IAS Nashik

12 वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे अपनी आगे की शिक्षा के लिए दिल्ली आ गए जहां से दिल्ली विश्वविद्यालय से उन्होंने अपने बीकॉम तथा एमकॉम की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वे यूपीएससी की तैयारी में जुट गए। वर्ष 2015 में वे अपनी पहली प्रीलिम्स में असफल रहे।

Shubham Gupta Biography

जिसमें असफल होने का कारण उन्होंने अपने प्रयास में की गई लापरवाही को बताया। असफल प्रयास के बाद उन्होंने सारे बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए तैयारी की और वर्ष 2016 में उन्होंने 366वीं रैंक हासिल की लेकिन वे इससे संतुष्ट नहीं थे।

उन्होंने 366 वीं रैंक के अंतर्गत मिली इंडियन ऑडिट और अकाउंट सर्विस की नौकरी के साथ-साथ अपनी तैयारी भी जारी रखी। लेकिन वर्ष 2017 में फिर से उन्हें सफलता नहीं मिली इसके बाद भी (Shubham Gupta) ने हार नहीं मानी और तैयारियों में जुटे रहे जिसके फलस्वरूप वर्ष 2018 में उन्होंने 6 वीं रैंक हासिल की। शुभम कहते हैं कि हमें हमेशा खुद पर विश्वास रखना चाहिए तथा तैयारी में  अपना 100% देना चाहिए। सफलता और असफलता दोनों ही हमारे जीवन का हिस्सा हैं इसलिए हमें कभी भी असफलता से हताश नहीं होना चाहिए।

Shubham Gupta Biography in Hindi

अपनी रणनीति के बारे में बात करते हुए (Shubham Gupta) ने बताया कि  उन्होंने 2015 में युपीएससी की तैयारी शुरू की जिसके बाद सर्वप्रथम उन्होंने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामलों तथा देश की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण संबंधित  खबरों से अवगत होने के लिए अखबार पढ़ना शुरू किया। मुख्य परीक्षा के लिए उन्होंने अपने विषय का चुनाव करते हुए एनसीईआरटी पुस्तकें पढ़ीं तथा अपनी कमजोरियों का पता लगाने के मॉक टेस्ट भी दिए।उन्होंने बताया की मुख्य परीक्षा में उत्तर को अच्छी तरह से व्यक्त करने के लिए उसके बारे में उपयुक्त ज्ञान का होना बेहद जरूरी है।

जिसके लिए  उन्होंने अपने  वैकल्पिक विषयों  के नोट्स बनाने शुरुआती तैयारियों में ही शुरू कर दिए थे। इंटरव्यू के बारे में (Shubham Gupta) ने बताया की इस दौरान अपने आत्मविश्वास को बनाए रखना महत्वपूर्ण है. इससे आप पूछे गए प्रश्नों का सही से उत्तर दे पाएंगे।

सुनिए (Shubham Gupta) की कहानी उन्हीं की जुबानी!

6वीं रैंक हासिल कर (Shubham Gupta) ने यह साबित कर दिया कि कोई भी व्यक्ति सही रणनीति तथा मेहनत से युपीएससी में सफलता हासिल कर सकता है बस उसे जरूरत है कड़ी मेहनत और हार न मानने वाले जज्बे की।