यंगेस्ट SDM Nasin M Nishant की सक्सेस स्टोरी, कभी कोचिंग फीस के लिए पकड़ने पड़े थे संचालक के पैर

बिहार की राजधानी पटना से करीब 150 किलोमीटर दूर सीतामढ़ी जिले में एक छोटा सा गांव है बासोपट्टी। यहां के बेटे ने बिहार का सबसे युवा एसडीएम बनकर कामयाबी की नई कहानी लिख दी। नाम है नसीन कुमार निशांत।

SDM Nasin Kumar Nishant की सक्सेस स्टोरी बिहार के यंगेस्ट एसडीएम नसीन कुमार निशांत की जिंदगी में एक वक्त ऐसा भी आया था जब इनको कोचिंग की फीस को लेकर संचालक के पैर पकड़ने पड़े थे। हालांकि बाद में नसीन ने इंजीनियरिंग की और एसडीएम भी बने।

मधुबनी में डिप्टी कलेक्टर बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने जून 2021 में 64वीं बिहार प्रशासनिक सेवा परीक्षा का रिजल्ट घोषित किया था, जिसमें अपने पहले ही प्रयास में नसीन कुमार प्रशांत ने 140वीं रैंक प्राप्त कर महज 22 साल की उम्र में एसडीएम बनने में सफलता हासिल की थी।

मधुबनी में सीनियर ​डिप्टी कलेक्टर बने नसीन कुमार नसीन कुमार प्रशांत को अब 28 अक्टूबर को ही बिहार के मधुबनी में सीनियर ​डिप्टी कलेक्टर के रूप में पोस्टिंग मिली है। एक-दो दिन में मधुबनी जाकर ज्वाइन करेंगे। अपनी पहली पोस्टिंग को लेकर नसीन काफी उत्साहित हैं।

नसीन ने बताया कि बीपीएससी का फार्म भरा तब उनकी उम्र 22 साल थी। फिर कड़ी मेहनत के दम पर अपने बैच में बिहार का सबसे यंगेस्ट एसडीएम बनने का गौरव प्राप्त हुआ। बीएएस एसडीएम नसीन कुमार निशांत का परिवार नसीन कुमार प्रशांत का जन्म 13 अप्रैल 1996 को पुपरी एसडीएम कोर्ट में वकील महेंद्र पासवान व शिक्षिका मंजू कुमारी के घर हुआ।

मां का फरवरी 2017 में निधन हो गया। नसीन चार भाइयों में सबसे छोटे हैं।

नसीन कुमार निशांत की शिक्षा बिहार के सबसे युवा सीनियर डिप्टी कलेक्टर नसीन कुमार निशांत ने छठी से दसवीं तक की पढ़ाई डीएवी स्कूल पुपरी सीतामढ़ी से की। फिर दरभंगा के स्कूल में 12वीं कक्षा में दाखिल लिया। नसीन दसवीं में टॉपर रहे थे।

कोटा से की आईआईटी की कोचिंग नसीन कुमार निशांत कहते हैं कि उनका एनआईटी में चयन हो गया था, मगर वे आईआईटी से माइनिंग इंजीनियर की डिग्री हासिल करना चाहते थे। इसलिए राजस्थान के कोटा चले आए। तब परिवार की आर्थिक ​स्थिति सही नहीं थी। परिजनों ने सिर्फ 35 हजार रुपए दिए।

क्यों पकड़े संचालक के पैर? नसीन के पास 35 हजार रुपए ही थे जबकि कोटा में कोचिंग की फीस ही 76 हजार रुपए थी। मैस का खर्च अलग। इस पर नसीन ने कोचिंग संचालक के पैर पकड़ लिए और उन्हें भरोसा दिलाया कि वो दसवीं का टॉपर रहा है। आईआईटी की परीक्षा पास कर सकता है। फीस कम करके उसे दाखिला दिया जाए।

फिर नाममात्र की फीस में की कोचिंग कोटा में कोचिंग वालों ने नसीन के सामने शर्त रखी कि एक माह बाद टेस्ट होगा, जिसमें अगर वो 200 नंबर आता है तो फीस कम हो सकती है। नसीन उसमें 211 नंबर लाए। फिर नाममात्र फीस में कोचिंग की और आईआईटी बीएचयू से इंजीनियरिंग की।