पानी से उड़ने वाला सैटेलाइट बना रहा है नासा, होगी करोड़ों रूपए की बचत

विज्ञान इस वक्त इतनी तेजी से आगे बढ़ रहा है की अब हर कुछ दिन पर कोई न कोई नए इनोवेशन या आविष्कार की खबरें हमें मिलती रहती है। एक जमाना था जब लोग कई सालों तक दुरी की वजह से एक दसूरे को देख नहीं पाते थे, पर आज विज्ञान ने इसे न सिर्फ मुमकिन कर दिया है, बल्कि अब तो ये बिलकुल ही सामान्य लगता है।

आज हम 1 फोन के जरिये क्या नहीं कर सकते हैं और इन सब का श्रेय जाता है, उन हजारों वैज्ञानिकों को जो हमेशा नए इनोवेशन और खोज में लगे रहते हैं। दुनिया की सबसे बड़ी स्पेस एजेंसी नासा भी एक बहुत ही अलग और क्रांतिकारी प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। नासा का ये प्रोजेक्ट अगर सफल होता है तो इस से करोड़ों रूपए की बचत हो सकती है।

आपको बता दें की नासा एक ऐसे सैटेलाइट बनाने पर काम कर रही है जो पानी से उड़ान भर सकेगा, इसका मतलब ये हुआ की इस सैटेलाइट में ईंधन के तौर पर पानी का इस्तेमाल किया जायेगा। अमीरीकी स्पेस एजेंसी पानी से उड़ने वाले सैटेलाइट क्यूबसेट को जल्द लांच करने जा रही है। नासा अपने पाथफाइंडर टेक्नोलॉजी डिमॉन्सट्रेटर प्रोजेक्ट के तहत पहली बार पानी को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करने वाली सैटेलाइट लांच करने जा रही है।

मालूम हो की इस रॉकेट को नासा स्पेस एक्स के फाल्कन 9 राकेट की मदद से अंतरिक्ष में भेजने वाली है, नासा का कहना है की अगर ये मिशन सफल होता है, तो फिर इस सैटेलाइट को चाँद और मंगल जैसे मिशन पर भी भेजा जा सकता है। पानी से ईंधन लेने के वजह से इस सैटेलाइट से अगर कोई और सैटेलाइट टकराता है, तो ऐसे में विस्फोट का खतरा या तो कम रहेगा या नहीं होगा, ऐसा नासा का मानना है।

दुनिया की नंबर 1 स्पेस एजेंसी मानी जाने वाली नासा का कहना है की पानी से चलने की वजह से इस सैटेलाइट से प्रदुषण भी नहीं होगा जोकि पर्यावरण के लिए काफी अच्छा है। क्यूबसैट का प्रोपल्शन सिस्टम इस सैटेलाइट के अंदर स्थित पानी से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के कणों को तोड़कर सैटेलाइट को आगे बढ़ने में मदद करेगा।

नासा के अनुसार क्यूबसैट का सोलर पैनल सूरज की किरणों से एनर्जी लेकर प्रोपल्शन सिस्टम को ऊर्जा देगा। जिससे पानी से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के कण अलग हो सकेंगे और इस तरह से ये सैटेलाइट पानी को ईंधन के रूप में इस्तेमाल करके उड़ान भर सकेगा। बता दें की ये सैटेलाइट धरती की लौ अर्थ ऑर्बिट में तकरीबन 160 किमी की उचाई पर उड़ेगी। अगर नासा का ये मिशन सफल होता है तो यकीनन इससे करोड़ों डॉलर्स की बचत की जा सकेगी।

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