45 आदमियों के बीच अकेली महिला कुली है संध्या, बच्चों को बनाना चाहती है IAS

एक महिला को अपने जिंदगी में बहुत साड़ी कठिनियों  का सामना करना पड़ता है। आज हम एक ऐसे महिला के बारे में बताने जा रहे है जिसकी कहानी पढ़कर आपके आँख से आंसू निकल जाएगा। यह कहानी है Sandhya Marawi की जिसने अपने परिवार के भरण पोषण के लिए कुली का काम करती है। अपने बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए अपने गावं से 250 km की सफर तय कर कुली का काम करने कटनी जंक्शन आती है।

Sandhya Marawi Katani

संध्या मरावी (Sandhya Maravi) की कहानी:

संध्या मरावी कुंडम जबलपुर के रहने वाली है इनकी पति की असामयिक देहांत 2016 में हो गया। सास ससुर का पहले ही देहांत होने के कारण घर में इनके को छोड़कर कोई आय का श्रोत नहीं था। पैसो की तंगी के कारण अपने पति का श्राद्ध भी अच्छे ढंग से नहीं कर पायी थी। इनके पति इनके ऊपर 3 बच्चों की जिम्मेवारी  सोपकर इस दुनिया को अलविदा कह दिया।

एक महिला को सबसे बड़ा दुःख तब होता है जब उनके पति उनके साथ नहीं हो। घर में आय नहीं होने के कारण इन्होने अपने गावं में काम करना शुरू किया। गावं कुंडम में 8 घंटे मजदूरी करती और 60 रुपये इनको मिलता। इन 60 रुपये में डेली रासन का खर्च निकाल पाती। लेकिन बच्चे को पढ़ाने की जिमेवारी भी थी यह पूरा नहीं हो रहा था।

Sandhya Marawi

तो इन्होने कुली का काम करने का सोचा और वह अपने बच्चों के भविष्य को उज्जवल करने के लिए चल पड़ी Coolie का काम करने यह पहली महिला कुली है जो कटनी जंक्शन पर महिला Coolie के रूप में काम करती है। इनके तीन बच्चे है 10 Years के साहिल , 8 साल के हर्षित और 6 साल की पायल।

 

Sandhya Maravi अपने गावं से जबलपुर आती है और फिर जबलपुर से कटनी और कटनी में काम करती है। 45 आदमियों के बीच यह पहली महिला है जो कुली का काम कटनी जंक्शन पर करती है अपने आर्थिक तंगी के कारण यह लोगो का बोझ अपने सर पर उठाकर ढोती है। अगर आप कटनी जंक्शन गए होंगे तो आप जरूर इनको देखे होंगे।

Sandhya Marawi Katani

संध्या मरावी कहती है की मैं अपने बच्चों की अफसर बनाउंगी मैं कठिन मेहनत करके अपने बच्चे का भविष्य बदलना चाहती हूँ। मेरे पति ने मुझ पर तीन जिमेवारी सौप कर गए है उन्हें मुझे पूरा करना है।

Sandhya Marawi

संध्या कटनी जंक्शन पर बिना खाए दिन भर काम करती है वह खाना इसीलिए नहीं खाती की कुछ रुपय बचा पाए और उस पैसे की अपने बच्चों के पढाई में खर्च करना चाहती है।

संध्या की यह यह बात सुनकर आँख में आसूं आ जाते है। इनपर एक Quotes है, टूट जायेगी ये वक्त की दिवार भी एकदिन, तू आगे बढ तो सही।

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