क्या है नीली अर्थव्यवस्था? आखिर क्यों भारत और पूरी दुनिया में मची है होड़

ब्लू इकॉनमी एक ऐसी व्यवस्था है जिसकी मदद से व्यापार और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा जा सकता है। यह व्यापार समुद्रीय तट से होता है इसीलिये इसे ब्लू इकॉनमी कहा जाता है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लू इकॉनमी को बढ़ावा देने के लिए पूरा जोर सोर लगा दिया है। आपको बता दे की इस बार के बजट में प्रधानमंत्री ने Blue Economy के बारे में बात किया और कहाँ हमारी सरकार का पूरा प्रयास है की हमलोग समुद्रीय तट से होने वाले व्यापार को बढ़वा देंगे और साथ ही पर्यटन विभाग को तेज़ी से आगे ले जाएंगे। उन्होंने कहा की आप विकसित देशो को देखें वहां Travel एंड Tourism सबसे जयदा है लेकिन ऐसा हमरे भारत देश में नहीं है हमारी सरकार इसको बढ़वा देगी। आपलोगो इसको बढ़वा दे शहर को स्वाच बना कर रखें यह आपकी जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया था की कैसे भारत 2030 तक एक मजबूत ब्लू इकॉनमी का Example पेस करेगा। 

आपको बता दे की हमारा देश तीनों और से तटीय  इलाको से घिरा है। अगर नीली अर्थव्यवस्था को बढ़वा दिया जाता है तो भारत की Travel and Tourism पर भी असर पड़ेगा। यहाँ बहुत सारे Jobs Opportunity Create होगी बहुत लोगो को जीविका मुहया होगा। जब नीली अर्थव्यस्था के तहत विकास होगा तब बहुत सारे बंदरगाह और टूरिज्म के लिए स्पॉट्स  खुलेंगे और बहुत सारे Opportunity Create होगी।

बता दे आपको दुनिया में जितने भी महासागर है उनका GDP में पुरे विश्व के GDP में 5% का योगदान रहता है। आपको  सुनकर यह आश्चर्य लग रहा होगा लेकिन यह बात सच है। एक फैक्ट के अनुसार 350 मिलियन लोगों को जीविका महासागर से प्रपात होता है।

अगर  भारत सरकार पुरे जोर से काम करती है तो विभिन्न विभिन्न क्षेत्रो में विकास होगा चाहे वह मात्ष्य क्षेत्र हो कृषि क्षेत्र या पर्यटन क्षेत्र। कहा  जा सकता है की यह भारत एक मजबूत देश के रूप में उभरेगा क्यूंकि यहाँ तटीय क्षेत्र जयादा है पर्यटन क्षेत्र को बढ़वा देने से काफी मदद मिल सकती है अर्थव्यवस्था को। वैसे Covid19 ने पुरे विश्व की अर्थव्यवस्था को ख़राब कर दिया है जहां पूरी तरह से बाजार मंदी की और है और वहां Blue Economy को बढ़वा देना शायद हर देश के लिए फायदा होगा। 

अगर चीन की बात करें तो वहां पहले से ही नीली अर्थव्यवस्था को वहां की सरकार जोर देती है और वहां बहुत तेज़ी से इसपर काम हो रहा हैं बल्कि चीन ही नहीं पूरा विश्व अपनी अपनी अर्थव्यवस्था को सुधरने के लिए इसपर काम कर रहा  है।