चाय की दूकान पर काम करने वाला लड़का बना IAS, पिता का सिर फक्र से हो गया ऊंचा

[Success Story of IAS Topper Himanshu Gupta] भारत में सबसे बड़ी और कठिन परीक्षा UPSC को माना जाता है। इस एग्जाम को क्रैक करने का सपना लिए लाखों अभ्यार्थी हर साल परीक्षा में शामिल होते हैं। सबका सपना होता है की वो एक दिन इस एग्जाम को क्रैक करके अफसर बने। पर इस परीक्षा में कॉम्पिटशन इतना ज्यादा है की लाखों में से कुछ 600 से 800 कैंडिडेट्स ही सफल हो पाते हैं।

हर साल रिजल्ट्स आने के बाद UPSC क्लियर करने वाले बच्चों की सफलता की कहानियां भी हमें पता चलती है। आज हम साल 2018 में आईएएस की परीक्षा क्रैक करने वाले एक ऐसे ही लड़के के कहानी बताने जा रहे हैं। (IAS Success Story) में आज हम आपको  UPSC टॉपर (Himanshu Gupta) की जीवन की संघर्ष भरी कहानी बता रहे हैं।

हिमांशु गुप्ता उत्तर प्रदेश के बरेली के छोटे से गांव से तालुख रखते हैं। हिमांशु का परिवार उनके बचपन से ही काफी गरीबी में रहा है। उनके पिता दिहाड़ी मजदुर के तौर पर काम करते थे। कुछ समय बिता तो पिता ने एक चाय की स्टाल खोल ली थी। Himanshu Gupta बताते हैं की वो बचपन में अपने पिता का हाथ बटाने के लिए उनके साथ चाय की दूकान पर काम किया करते थे। हिमांशु कहते हैं की जब वो चाय की दूकान पर कभी-कभी काम करने आते थे। तो उन्हें कई लोग ऐसे भी मिलते थे जिन्हें पैसे तक गिनने नहीं आता था।

हिमांशु को ये चीज देखकर शिक्षा का महत्व समझ आ गया था। Himanshu ने एक टॉक से के दौरान बताया की उनका स्कूल उनके घर से तकरीबन 35 किमी दूर था। जिसके वजह से उन्हें रोज 70 किमी का सफर करना पड़ता था। 12 वीं तक की पढाई बरेली से ही करने के बाद हिमांशु को कुछ समझ नहीं आ रहा था की आगे वो क्या करें। फिर उन्हें इंटरनेट से हिन्दू कॉलेज के बारे में पता चला।

12 वीं में अच्छा मार्क्स होने के कारण उन्हें वहां दाखिला मिल गया है। हिमांशु बताते हैं की घर के हालत ऐसे नहीं थे की वहाँ से कोई उन्हें पैसे भेजे। इसलिए वो अपने खर्चा निकलने के लिए टूशन पढ़ाया करते थे इसके साथ वो ब्लॉग भी लिखते थे। हिमांशु कहते हैं की वो पहली बार किसी मेट्रो सिटी में आये थे और यहाँ कॉम्पिटशन काफी मुश्किल था। पर वो मेहनत करते रहे जिसके कारण वो अपने यूनिवर्सिटी में टॉप करने में भी सफल रहे।

(Himanshu Gupta) बचपन से ही कुछ बड़ा कारण चाहते थे। इसलिए उन्होंने UPSC की तैयारी करने का निर्णय लिया। हिमांशु ने बिना किसी कोचिंग के ही देश के सबसे बड़ी परीक्षा की तयारी शुरू कर दी थी। यह राह कतई आसान नहीं था। पर हिमांशु ने ऐसे ही चलना उचित समझा। हिमांशु कहते हैं की उनके पास कोचिंग में जाने के लिए उतने पैसे भी नहीं थे। इसलिए उन्होंने सेल्फ स्टडी से ही एग्जाम देने का फैसला किया। पहले प्रयास में हिमांशु गुप्ता बुरी तरह असफल हुए और उन्हें लगा की ये एग्जाम शायद उनके लिए नहीं है।

इसके बाद उन्होंने फिर से बेहतर तैयारी के साथ परीक्षा देने का निर्णय का लिया और इस बार उनकी मेहनत रंग लायी। साल 2018 में हुए UPSC की परीक्षा में हिमांशु को 304 वीं रैंक हासिल हुई और आखिरकार उन्होंने इस परीक्षा को क्लियर कर ही लिया। इसके साथ ही उन्होंने न सिर्फ अपने पिता बल्कि पुरे परिवार का नाम भी फक्र से ऊंचा कर दिया। (Himanshu Gupta) कहते है – इस से कोई फर्क नहीं पड़ता की आप कहा से आते है, आपके परिवार की आर्थिक स्थिति क्या है? या आप छोटे स्कूल से पढ़े हैं। अगर आपके सपने बड़े हैं तो आप जीवन में कहीं भी पहुंच सकते हैं।

सुनिए (Himanshu Gupta) की कहानी उन्हीं की जुबानी

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