गरीबी और सैंकड़ों परेशानियों की बाद भी नहीं हारे, बिना महंगी कोचिंग किये ही, पहले प्रयास में बने IAS!

[Deshal Dan Ratnu Biography in Hindi] जब इरादा हो कुछ कर दिखाने का तो कितनी ही मुश्किलें सामने आयें, इंसान उन सभी बाधाओं को दूर कर अपने सपने को पूरा कर ही लेता है। आज कहानी में हम आपको बताएंगे एक ऐसे ही व्यक्ति देशाल दान रत्नू के बारे में जिन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं हो पाने के बावजूद भी अपने आईएएस बनने के सपने को साकार किया।  

राजस्थान के जैसलमेर के छोटे से गांव सुमालियाई के रहने वाले देशलदान रतनू (Deshal Dan Ratnu) के पिता चाय की दुकान चलाते थे। इससे होने वाली आमदनी से वे 7 बच्चों सहित पूरे परिवार का भरण पोषण करते थे। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी ना होने के कारण 7 भाई बहनों में केवल देशाल दान और उनके बड़े भाई ही पढ़ पाए थे।

देशलदान रतनू (Deshal Dan Ratnu) ने अपनी 10वीं तक की शिक्षा अपने गांव के सरकारी विद्यालय से ही प्राप्त की। इसके बाद वे आईआईटी की तैयारी करने के लिए कोटा चले गए। वे बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थे। उन्होंने अपने मेहनत के बल पर जेईई के एंट्रेंस एग्जाम में सफलता हासिल की। इसके बाद उन्होंने आईआईटी जबलपुर से बीटेक में स्नातक किया।

ग्रेजुएशन करने देशलदान रतनू (IAS Deshal Dan Ratnu) बाद वे आईएएस की तैयारी करने के लिए दिल्ली आ गए। लेकिन उनकी स्थिति ऐसी नहीं थी कि वो अपनी बेहतर तैयारी के लिए कोई कोचिंग संस्थान में पढ़ सकें। उनके आईएएस बनने के सपने को पूरा करने के में उनके परिवार ने उनका साथ दिया। उन्होंने उनके अध्ययन सामग्री का सारा खर्च उठाया।

जब देशाल ने यूपीएससी की तैयारी करनी शुरू की उस दौरान  परीक्षा में काफी कम समय रह गया था। लेकिन उन्होंने दिन रात मेहनत कर पढ़ाई करनी शुरू कर दी और इसका नतीजा यह हुआ कि देशाल ने वर्ष 2017 में केवल 24 वर्ष की उम्र में  UPSC की परीक्षा में सफलता हासिल कर ली। अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी की इस कठिन परीक्षा में बिना कोचिंग किए ही 82वां स्थान प्राप्त कर टॉपर्स की सूची में अपना स्थान बनाया।

देशाल (Deshal Dan Ratnu) कहते हैं की आईएएस बनने की प्रेरणा अपने बड़े भाई से मिली थी वे भारतीय नौसेना में थे। वे जब भी छुट्टियों में घर आते थे उन्हें अपनी नेवी से जुड़ी कहानियां सुनाया करते थे। वे उन्हें भारतीय वायुसेना या एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस में जाने को लेकर प्रेरित करते थे।उन्होंने ही देशाल को आईएएस के बारे में बताया था। वर्ष 2010 में उनके भाई आईएनएस सिंधुरक्षक पनडुब्बी में हुई दुर्घटना में शहीद हो गए थे।

बता दें की उस समय देशलदान रतनू (Deshal Dan Ratnu) दसवीं कक्षा में थे। वे भी अपने भाई की तरह देश की सेवा करना चाहते थे। देशाल ने अपने एक साक्षात्कार में बताया था कि जब उन्होंने यूपीएससी में सफलता हासिल की थी तो उस समय उनके पिता को आईएएस के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

पर अपने बेटे को मिल रहे सम्मान से वे बेहद खुश थे।देशाल की कहानी से ये साबित होता है कि यदि कोई व्यक्ति मेहनत से अपने लक्ष्य का पीछा करे तो वो उसे निश्चित ही पा सकता है।

देखिये Deshal Dan Ratnu का दिल्ली नॉलेज ट्रैक को दिया हुआ ये इंटरव्यू! 

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